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इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत से फेल हुई सांप्रदायिक दंगे की साजिश?

Date : 2018-12-06 04:14:00 PM

लखनऊ -(06-12-2018)-समय, इलाका और हालात इस ओर इशारा करते हैं कि बुलंदशहर हिंसाको सांप्रदायिक दंगे का रूप देने की साजिश थी। इसके पीछे मकसद यह भी था कि विदेशी मीडिया में भी यह दंगा सुर्खियों में रहे। पर, इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत से हिंसा आगे बढ़ने से रुक गई। ऐसा इसलिए भी हुआ कि घबराई हुई भीड़ तितर-बितर हो गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कुछ ऐसा ही मानना है। एक अधिकारी ने बताया, 'इंस्पेक्टर की मौत से भीड़ को मामला बढ़ने का अहसास हो गया था। इसी वजह से जो लोग हिंसा और आगजनी में शामिल थे, वे घबराकर भाग गए। उन्हें यह डर रहा होगा कि साथी की मौत से पुलिस आक्रामक हो सकती है।' उन्होंने आगे कहा, 'इस तरह ड्यूटी पर रहते हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई लेकिन उनकी हत्या ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।' पुलिस का कहना है कि महाव गांव का वह इलाका जहां से सोमवार को गाय का मांस जब्त किया गया था, उसे बड़ी बारीकी से चुना गया था। इस वजह से जांच करने वाले अधिकारियों ने एक बड़ी साजिश की संभावना की आशंका जताई है। यह गांव स्याना पुलिस सर्किल में आने वाले स्थानीय पुलिस आउटपोस्ट से करीब 500 मीटर की दूरी पर है। यह सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाका है और 1990 के दशक की शुरुआत में जिले के खुर्जा कस्बे में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद यहां करीब एक महीने तक कर्फ्यू लगाया गया था। महाव गांव चिंगरावटी और बांस कला गांव से भी जुड़ा हुआ है जहां एक समुदाय विशेष की संख्या अधिक है। न सिर्फ यह बल्कि जिस सड़क पर पुलिस आउटपोस्ट स्थित है, उसका इस्तेमाल पिछले दिनों हजारों की संख्या में लोग रामपुर, बरेली, मुरादाबाद और लखनऊ जाने के लिए कर रहे थे। ये लोग दरियापुर में एक धार्मिक आयोजन से लौट रहे थे। यह सड़क दिल्ली-मुरादाबाद हाइवे से जुड़ी हुई है। 

हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने सबसे पहले इस रूट में पड़ने वाले इलाकों को घेरा और धार्मिक जलसे से ट्रैफिक डायवर्ट किया जहां लाखों की संख्या में लोग मौजूद थे। राज्य सरकार ने भी माना है कि हिंसा एक बड़ी साजिश का हिस्सा था और मंगलवार को इस पर एक समीक्षा बैठक भी हुई थी। बुधवार को डीजीपी ओपी सिंह ने हिंसा को साजिश बताते हुए कहा भी था कि इलाके में गोमांस कैसे आया और इसके पीछे कौन है यह जांच का मुख्य फोकस है। जांचकर्ता इसमें भी उलझे हुए हैं कि कोई खुले मैदान में गोकशी क्यों करेगा बशर्ते इसके पीछे कोई साजिश न हो। सूत्रों ने यह भी कहा कि इलाके में गोकशी कोई नई बात नहीं है। हाल ही में इसी पुलिस आउटपोस्ट के बाहर गोकशी के खिलाफ एक बड़ा प्रदर्शन हुआ था जहां सोमवार को हिंसा भड़की थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, 'यह इलाका इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी से यह काफी नजदीक भी है। अगर कोई दंगा भड़का होता तो इसकी गूंज नैशनल और इंटरनैशनल मीडिया तक पहुंचने की भी आशंका थी।' वहीं बुधवार को पुलिस ने बुलंदशहर हिंसा को साजिश का हिस्सा बताते हुए यह भी कहा कि स्याना के पास जो गोमांस मिला था वह करीब दो दिन पुराना था। पुलिस ने यह भी बताया था कि मामले में 4 लोगों को इस घटना में गिरफ्तार किया था लेकिन यह नहीं स्पष्ट है कि जिस दिन उस जगह पर कथित गोकशी हुई थी वहां ये लोग शामिल थे या नहीं। गिरफ्तार लोगों के नाम साजिद, सर्फुद्दीन, बन्ने और आसिफ हैं। साजिद और सर्फुद्दीन नया बांस से ताल्लुक रखते हैं जबकि बन्ने और आसिफ अहमदगढ़ और औरंगाबाद से हैं।