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बज चुका है विश्व युद्ध का अलार्म, पुतिन ने दी यूक्रेन को जंग की धमकी

Date : 2018-12-06 11:53:00 AM

नई दिल्ली-(06-12-2018)-दुनिया में एक बार फिर महायुद्ध का अलार्म बज गया है। शक्तिशाली देश रूस और यूक्रेन आमने-सामने हैं और दोनों के बीच तनाव बढ़ चुका है। यूक्रेन ने अपनी सेना काले सागर के किनारे भेज दी है। जंगी जहाज, लड़ाकू विमान और घातक हथियार पहुंच चुके हैं। यूक्रेन ने नाटो सदस्य देशों से भी काला सागर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की अपील की है। दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी अपनी सेना को तैयार रहने का फरमान जारी कर दिया है। पुतिन ने धमकी दी है कि जंग तो होकर रहेगी।रूस और यूक्रेन के बीच जंग कभी भी हो सकती है। हालांकि रूस की सैन्य ताकत के सामने यूक्रेन की सैन्य ताकत बेहद कम है। बावजूद इसके यूक्रेन पुतिन की सेना को कड़ी टक्कर दे रहा है। रूस दुनिया का एक ऐसा सुपर पावर देश, जिसे टक्कर देने से पहले अमेरिका भी सौ बार सोचता है। बावजूद इसके यूक्रेन रूस को आंख दिखा रहा है। इस वक्त रूस का पड़ोसी देश यूक्रेन, रूसी सेनाओं के निशाने पर आ गया है। कुछ दिन पहले रूस ने यूक्रेन की नौसेना के तीन जहाजों पर हमला कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया था, जिसके बाद यूक्रेन भी आक्रामक हो गया है।यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने रूस को मुंहतोड़ जवाब देने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने साफ कह दिया है कि वो किसी भी हाल अब पीछे नहीं हटने वाले हैं।  जंग का खतरा मंडराते देख यूक्रेन अपनी रिजर्व सेना के 1500 से ज्यादा जवानों को युद्धाभ्यास के लिए बुला लिया है ताकि रूस को उसकी ताकत का एहसास हो जाए और उसपर पहले हमले की सोच बदल ले। 


यूक्रेन की सेना ये युद्धाभ्यास राजधानी कीव से करीब 100 किलोमीटर दूर काले सागर के किनारे कर कर रही है। यूक्रेन के मुताबिक युद्धाभ्यास में जुटी उसकी ये सेना तो सिर्फ ट्रेलर है।इस ड्रिल के लिए यूक्रेन ने टैंक, लड़ाकू विमान, जंगी जहाज और सैनिकों को शामिल किया है।यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको एक तरफ अपने बल बूते पर रूस को रोकने की कोशिश में जुटे हैं। वहीं दूसरी तरफ उन्होंने जर्मनी समेत तमाम नाटो देशों से काला सागर में अपने नौसैनिक बढ़ाने की अपील की है ताकि रूस को इस क्षेत्र में अपना दखल न दे सके। नाटो यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन में 28 देश शामिल हैं, जिसमें 70 लाख से ज्यादा सैनिक है। एक अनुमान के मुताबिक विश्व का कुल रक्षा बजट का 70 फीसदी हिस्सा नाटो देशों के पास है। ऐसे में नाटो की फौजी ताकत का मुकाबला करना रूस के बस की बात नहीं है, ऐसा माना जाता है, लेकिन पुतिन के दिमाग में क्या चल रहा है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने भी साफ कह दिया है कि यूक्रेन में जब तक पेट्रो पोरोशेंको की सरकार है, तब तक युद्ध होगा। चार साल पहले यानी 2014 में यूक्रेन की वजह से 10 हजार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। ऐसे में पीछे हटने का सवाल ही नहीं है। बार -बार सवाल उठता है कि आखिर रुस और यूक्रेन के बीच जंग के हालात क्यों बनते रहते हैं, जबकि रूस और यूक्रेन का 1991 में, एक साथ उदय हुआ था, जब सोवियत संघ के 1991 में टुकड़े हुए थे। असल में रूस इस बात को लेकर यूक्रेन से बहुत नाराज है कि वो पश्चिमी देशों से अच्छे संबंध क्यों बना रहा है। रूस इसे अपने लिए खतरा मानता है। यही कारण है कि यूक्रेन पश्चिम और रूस की खींचतान के बीच फंसा हुआ है। यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा देश यूक्रेन, रूस की आंखों में ऐसे खटक रहा है, जैसे मानों कोई कांटा हो।