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NGT के जुर्माने से राज्य-केंद्र बेखबर, जनता का पैसा जाता है फाइन में

Date : 2018-12-04 11:53:00 AM

नई दिल्ली -(04-12-2018)-नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने सोमवार को दिल्ली सरकार को 25 करोड़ रुपए जुर्माने के तौर पर भरने का आदेश दिया है। शहर में प्रदूषण के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाने के कारण यह जुर्माना दिल्ली सरकार पर लगा है। इससे पहले पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र सरकार पर भी एनजीटी ने जुर्माना लगाया है। सरकारें प्रशासकीय इकाइयों की तरफ से लगाए ऐसे जुर्मानों को लेकर काफी बेपरवाह नजर आती हैं। ग्रीन टैक्स को लेकर सरकारों का रुख इतना लचर क्यों है, आइए समझते हैं... 


सरकारों के लिए जुर्माना देना है आसान 
प्रशासकीय इकाई की तरफ से लगाए गए जुर्माने को लेकर सरकारों का रुख कभी भी बहुत ज्यादा गंभीर नहीं रहा है। इस जुर्माने के खिलाफ अदालत में अपील का विकल्प सुरक्षित है। इसके साथ ही नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल को देने वाला जुर्माना किसी भी सूरत में बड़े प्रॉजेक्ट की तुलना में बहुत कम होते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि यह जुर्माना सरकार को अपनी जेब से नहीं भरना होता है। यह जुर्माना आम जनता की टैक्स से मिले पैसों से दिया जाता है। 

एनजीटी को केंद्र सरकार भी नहीं लेती गंभीरता से 
सिर्फ राज्य सरकारों का ही नहीं खुद केंद्र सरकार भी एनजीटी को बहुत गंभीरता से नहीं लेती है। एनजीटी का गठन संसद के द्वारा ही किया गया था, लेकिन इसके पूरी तरह से कार्यान्वन के लिए एनजीटी को भी सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा था। इस साल ही सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में ट्राइब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार केंद्र सरकार को दिया है। इसमें एनजीटी के सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार भी केंद्र के पास ही है। इस लिहाज से भी केंद्र सरकार के पास एनजीटी को लेकर ज्यादा बड़े अधिकार हैं। 

कई राज्यों पर एनजीटी, सीपीसीबी ने लगाया जुर्माना 
दिल्ली सरकार पर ही नहीं कई राज्यों पर एनजीटी और सीपीसीबी ने जुर्माना लगाया है। पिछले सप्ताह ग्रीन कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार पर कोलकाता और हावड़ा में वायु प्रदूषण स्तर कंट्रोल करने में नाकाम रहने पर 5 करोड़ का जुर्माना लगाया। ग्रीन कोर्ट ने यह जुर्माना सीपीसीबी को देने का आदेश दिया। पंजाब सरकार को सतलुज और व्यास नदियों को प्रदूषित करने के बदले 14 नवंबर को 50 करोड़ जुर्माना भरने का आदेश दिया था।