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30% घटा कच्चे तेल का दाम, तो पेट्रोल 10% ही सस्ता क्यों?

Date : 2018-11-28 11:56:00 AM

नई दिल्ली-(28-11-2018)-कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में जितनी गिरावट आ रही है, उतनी कमी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में नहीं हो रही। ऐसे में आम उपभोक्ता इस सोच में पड़ गया है कि जब चार वर्ष पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों का निर्धारण बाजार के हवाले कर दिया गया और इसके मुताबिक जब कच्चा तेल महंगा होने पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा दी जाती हैं तो अब कच्चा तेल जितना सस्ता हो रहा है, उसी तुलना में पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे। आइए जानतें हैं इसका जवाब... क्रूड ऑइल की कीमतें 3 अक्टूबर को 86.70 डॉलर प्रति बैरल के सर्वोच्च स्तर के मुकाबले अभी 30 प्रतिशत घटकर प्रति बैरल 60 डॉलर से भी नीचे आ गई हैं। हालांकि, इस दौरान देश में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में महज 7 से 11 प्रतिशत की कटौती हुई है। तेल कंपनियां डीजल-पेट्रोल के गेट प्राइसेज तय करती हैं। ये वे कीमतें होती हैं जो तेल रिफाइनरीज पेट्रोल-डीजल के रिटेलर्स से वसूलती हैं। गेट प्राइसेज संबंधित पक्ष (15 दिन) में कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत, कच्चे तेल की ढुलाई, इसके इंश्योरेंस और अन्य खर्चों को ध्यान में रखते हुए तय किए जाते हैं। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स और डीलरों के कमीशन मिलाकर जो कीमतें बनती हैं, उन्हीं कीमतों पर पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं को प्राप्त होते हैं। ये कीमतें प्रतिदिन तय होती हैं। उपभोक्ताओं को कच्चे तेल में गिरावट का आंशिक लाभ ही इसलिए मिल पाता है 


क्योंकि देश की तेल कंपनियां कच्चे तेल की पिछले 15 दिनों की औसत अंतरराष्ट्रीय दरों के आधार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें तय करती हैं। इसलिए, हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट का फायदा आने वाले कुछ दिनों में मिलेगा। हालांकि, कच्चे तेल के मुकाबले पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम घटने का एक कारण यह भी है कि कच्चे तेल में बड़ी गिरावट के वक्त तेल कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ा देती हैं। 8 अक्टूबर से 9 नवंबर के बीच गेट प्राइसेज 10 प्रतिशत घटे, लेकिन तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर तय हुई बेंचमार्क प्राइस और रुपये का विनिमय मूल्य 22 प्रतिशत घटा है। यानी, इस दौरान डॉलर के मुकाबले रुपया 22 प्रतिशत मजबूत हुआ। गौरतलब है कि डीलरों को जिन कीमतों पर डीजल मिलता है, उसमें सिर्फ 4.5 प्रतिशत की ही कटौती की गई जबकि बेंचमार्क रेट 11.5 प्रतिशत गिर गया। इसका मतलब है कि ऑइल कंपनियों का मुनाफा प्रति लीटर पेट्रोल के लिहाज से बढ़कर 4.98 रुपये जबकि प्रति लीटर डीजल पर बढ़कर 3.03 रुपये हो गया है। पिछले महीने जब तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ रही थीं, तो सरकार के निर्देश पर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने 1 रुपये प्रति लीटर की दर से तेल सस्ता किया था। इसमें तेल कंपनियों को जितना नुकसान हुआ, उसकी वसूली का वक्त आ गया है। साथ ही, तेल कीमतों को नियंत्रण से छूट मिलने के अब तक के चार वर्षों में ऐसे कई मौके आए जब देश की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कीमतों को आधार नहीं बनाकर तेल की कीमतें तय करने में थोड़ी नरमी बरती थीं, खासकर चुनावों के दौरान। भले ही तब अंतररष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ीं या घटी हों।