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RBI, केंद्र फिर टकराव की राह पर, हंगामेदार रह सकती है अगली बैठक

Date : 2018-11-27 06:04:00 PM

 नई दिल्ली-(27-11-2018)-केंद्र सरकार आरबीआई बोर्ड की अगले महीने होने वाली बैठक के दौरान कुछ कमजोर बैंकों के कर्ज देने पर लगी पाबंदियों में ढील देने के साथ ही केंद्रीय बैंक के कामकाज के संचालन के नियमों की समीक्षा का दबाव बना सकती है। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है। पहचान जाहिर न करने की शर्त पर मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि RBI के बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नामित सदस्यों के साथ ही अन्य सदस्य उन बैंकों को तथाकथित प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन की सूची से बाहर निकालने का दबाव बनाएंगे, जिनकी आर्थिक सेहत में सुधार हुआ है। इस सूची में सार्वजनिक क्षेत्र के कुल 11 बैंक शामिल हैं, जिनके कर्ज देने पर आरबीआई ने रोक लगा रखी है। सरकार के प्रस्तावों से यह साफ जाहिर होता है कि 14 दिसंबर को होने वाली बोर्ड की बैठक हंगामेदार रह सकती है। केंद्रीय वित्त मंत्री और आरबीआई के बीच कई मुद्दों पर टकराव चल रहा है।


इन मुद्दों में आरबीआई से सरकार को सरप्लस फंड का ट्रांसफर, बैंकों के कर्ज देने के नियमों में ढील और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र में नकदी की मात्रा बढ़ाना शामिल हैं। इस महीने की शुरुआत में हुई आरबीआई बोर्ड की बैठक में हालांकि दोनों पक्षों ने सुलह के संकेत दिए थे। सूत्रों ने कहा कि आरबीआई बैड लोन को लेकर केवल उनके कर्ज देने पर पाबंदी के बजाय इसे रोकने के लिए एक योजना भी लेकर आने वाली है। उन्होंने कहा कि बोर्ड के सदस्य आरबीआई को मॉनिटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन सहित कई मुद्दों पर सुपरवाइजरी कंट्रोल बढ़ाने के अलावा, एक प्रॉम्प्ट करेक्टिव प्लान लेकर आने के लिए भी कह सकते हैं।बीते 25 नवंबर को केंद्रीय आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि आरबीआई बोर्ड की आगामी बैठक में केंद्रीय बैंक के गवर्नेंस स्ट्रक्चर में बदलाव पर चर्चा करने की योजना है। गर्ग के बयान के बाद केंद्र और आरबीआई के बीच असंतोष साफ झलक रहा है। गर्ग आरबीआई के बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा नामित सदस्य हैं।