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'मिल्क मैन' वर्गीज कुरियन, जिन्होंने दूध की कमी वाले देश को बना दिया सबसे बड़ा उत्पादक

Date : 2018-11-26 03:54:00 PM

नई दिल्ली -(26-11-2018)-देश को आजाद हुए 2 साल ही हुए थे। तत्कालीन बॉम्बे प्रांत (अब गुजरात) के अहमदाबाद से करीब 100 किलोमीटर दूर आणंद नाम का एक छोटा सा कस्बा। एक 29 साल का युवा डेयरी इंजिनियर स्थानीय को-ऑपरेटिव से जुड़ता है। उसकी पढ़ाई के लिए भारत सरकार ने स्कॉलरशिप दी थी, इसलिए वह बॉन्ड की अवधि को जैसे-तैसे काटने के लिए शुरुआत में अनमने ढंग से काम करता है। लेकिन को-ऑपरेटिव के उद्देश्यों को पूरी तरह समझने के बाद वह काम को लेकर गंभीर हो जाता है। उस वक्त किसी को नहीं पता था कि आगे चलकर यही युवा देश की श्वेत क्रांति का जनक बनेगा। आपने सही पहचाना। वह युवा कोई और नहीं, बल्कि 'मिल्कमैन ऑफ इंडिया' के नाम से मशहूर हुए डॉक्टर वर्गीज कुरियन थे और वह को-ऑपरेटिव संगठन ही आज का अमूल डेयरी है। आज डॉक्टर वर्गीज कुरियन की जयंती है। उनका जन्म 26 नवंबर 1921 को केरल के कोझिकोड में एक सीरियाई क्रिस्चन परिवार में हुआ था। साल 2012 में 90 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। आइए उनकी जयंती पर एक नजर डालते हैं अमूल के सफर पर। देश के सबसे मशहूर डेयरी ब्रैंड अमूल की नींव 1946 में आणंद में पड़ी थी। उस वक्त आणंद जिले में पोलसन डेयरी का सिक्का चलता था, जिसकी स्थापना 1930 में हुई थी।


 पोलसन डेयरी स्थानीय किसानों से कम कीमत पर दूध खरीदकर उसे ऊंचे दामों में बेचती थी। इतना ही नहीं, किसानों को किसी दूसरे वेंडर को भी दूध नहीं बेडॉक्टर कुरियन KDCMPUL को कोई सरल और आसान उच्चारण वाला नाम देना चाहते थे। कर्मचारियों ने अमूल्य नाम सुझाया, जिसका मतलब अनमोल होता है। बाद में अमूल नाम चुना गया। आणंद के डेयरी को-ऑपरेटिव की सफलता ने सरकार का ध्यान खींचा। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री डॉक्टर वर्गीज कुरियन से बहुत प्रभावित थे। उन्होंने 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) का गठन किया और डॉ. कुरियन को इस बोर्ड का चेयरमैन बनाया। देश में दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए जिस अभियान को शुरू किया गया, उसका नाम ऑपरेशन फ्लड था। डॉक्टर कुरियन की दूरदृष्टि और उनके कुशल नेतृत्व में 70 के दशक में श्वेत क्रांति यानी दुग्ध क्रांति का आगाज हुआ। अमूल मॉडल पर चलते हुए दूध की कमी वाला एक देश 1998 में अमेरिका को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। आज देशभर में 1.5 करोड़ से ज्यादा दूध उत्पादक अमूल से जुड़े हुए हैं। 

ये दूध उत्पादक देशभर में 1,44,500 डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटियों के जरिए अमूल तक अपना दूध पहुंचाते हैं। 184 डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव यूनियनों में दूध की प्रॉसेसिंग होती हैं। अमूल की 22 स्टेट मार्केटिंग फेडरेशन करोड़ों लोगों तक उसका दूध पहुंचाती हैं।चने देती थी। इस शोषण के खिलाफ 1946 में स्थानीय किसानों ने आंदोलन किया। किसानों ने हड़ताल कर दी। पोलसन डेयरी को दूध बेचना बंद कर दिया। किसानों ने सरदार बल्लभ भाई पटेल से संपर्क किया। उन्होंने बिचौलियों को खत्म करने के लिए को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनाने का सुझाव दिया। तय हुआ कि एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन होगा, जो किसानों को दूध की वाजिब कीमत देगी। KDCMPUL की शुरुआत सिर्फ 2 ग्रामीण को-ऑपरेटिव सोसाइटी से हुई। छोटे-छोटे किसानों से 1-1, 2-2 लीटर दूध इकट्ठा किया जाता था, जिसकी आपूर्ति बॉम्बे मिल्क स्कीम को की जाती थी। धीरे-धीरे और किसान इससे जुड़ते गए। 1948 के आखिर तक तक इससे 432 किसान जुड़ चुके थे। 1949 में वर्गीज कुरियन इससे जुड़े। तबतक KDCMPUL के पास इतना दूध इकट्ठा होने लगा जो बॉम्बे मिल्क स्कीम की खपत क्षमता से ज्यादा था। वर्गीज कुरियन के नेतृत्व में को-ऑपरेटिव की दिन दूना, रात चौगुनी प्रगति होने लगी।