BREAKING NEWS

image caption:

केदारनाथ धाम में बना नया इतिहास

Date : 2018-11-09 03:18:00 PM

भैयादूज के दिन आज भगवान शिव के 11वें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए आज बंद हो गया। भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली कपाट बंद होने के बाद शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए प्रथम पड़ाव रामपुर पहुंचेगी। 11 नवंबर को डोली अपने शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल में विराजमान होगी। सुबह 9 बजे मां यमुना के चचेरे भाई शनि देव (समेश्वर देवता) की डोली खरसाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई, जहां यमुनोत्री धाम में विशेष पूजा अर्चना कर दोपहर 12.15 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। वहीं इस साल केदारनाथ यात्रा ने नया इतिहास रचा है। पहली बार केदारनाथ धाम में सबसे ज्यादा 7 लाख 32 हजार 241 यात्री पहुंचे।इस दौरान तीर्थ पुरोहितों ने विशेष पूजा व गंगा लहरी का पाठ किया। डोली में सवार होकर गंगा की भोगमूर्ति जैसे ही मंदिर परिसर से बाहर निकलीं तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा।



 सेना की महार रेजीमेंट के बैंड की धुन और परंपरागत वाद्ययंत्रों के साथ डोली मुखबा के लिए रवाना हुई। अगले छह माह श्रद्धालु गंगा के दर्शन मुखबा में ही करेंगे। भैया दूज पर केदारनाथ के साथ-साथ यमुनोत्री के कपाट भी बंद कर दिए गए। वहीं, बदरीनाथ धाम के कपाट 20 नवंबर को बंद किए जाएंगे।बाबा केदार की डोली मंदिर की तीन परिक्रमा कर श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर रुद्रा प्वाइंट, लिनचोली, रामबाड़ा, भीमबली, जंगलचट्टी, गौरीकुंड, सोनप्रयाग में भक्तों को आशीष देते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामपुर पहुंचेगी। 10 नवंबर को डोली रामपुर से प्रस्थान करते हुए रात्रि प्रवास के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुचेंगी। यहां पर बाबा केदार की डोली के आगमन पर एक दिवसीय मेला भी आयोजित होगा। 11 नवंबर को बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति अपने शीतकालीन पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में विराजमान होगी। मंदिर के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि कपाट बंद होने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। साथ ही शीतकालीन गद्दी स्थल पर भी सभी व्यवस्थाएं कर दी गई हैं।