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बेटी की किताब में बोले थे मनमोहन सिंह, 'वित्त मंत्री का दर्जा रिजर्व बैंक गर्वनर से ऊपर'

Date : 2018-11-07 11:51:00 AM

आरबीआई के गवर्नर और वित्त मंत्री में चल रही खींचतान के बीच पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एक बयान का जिक्र भी हो रहा है। पूर्व पीएम ने अपनी बेटी दमन सिंह की किताब 'स्ट्रिक्टली पर्सनल: मनमोहन गुरुशरण' में कहा था कि वित्त मंत्री का दर्जा हमेशा ही रिजर्व बैंक के गवर्नर से ऊपर होता है। आरबीआई के गवर्नर रह चुके मनमोहन सिंह ने यहां तक कहा था कि आरबीआई गवर्नर सरकार के सामने तभी अड़ सकता है, जब वह नौकरी छोड़ने का मन बना ले। यह किताब पहली बार 2014 में प्रकाशित हुई थी। आरबीआई में अपने दिनों को याद करते हुए सिंह के हवाले से कहा गया है, 'यह हमेशा ही गिव ऐंड टेक वाला रिश्ता रहता है और मुझे कोई भी फैसला लेने से पहले सरकार को विश्वास में लेना होता था। रिजर्व बैंक का गर्वनर वित्त मंत्री से ऊपर नहीं हो सकता है। वित्त मंत्री के आदेश को रिजर्व बैंक का गर्वनर टाल नहीं सकता। यदि गर्वनर का मन नौकरी गंवाने का हो, तो वह ऐसा कर सकता है।'किताब में पूर्व पीएम ने 1983 में इंदिरा गांधी की सरकार में रिजर्व बैंक गवर्नर रहते हुए जिन कठिन परिस्थितियों का सामना किया था, उसका भी जिक्र किया है। इसमें जिक्र है कि रिजर्व बैंक की स्वायत्तता बैंकों को लाइसेंस देने के संबंध में प्रभावित होने की आशंका से सिंह ने एक वक्त में अपने पद से इस्तीफा देने के बारे में भी सोचा था। मनमोहन ने आरबीआई गवर्नर रहते हुए इंदिरा गांधी सरकार से हुई अनबन का जिक्र करते हुए कहते हैं, 'ऐसी परिस्थिति पैदा हो गई थी, जिससे मेरा सरकार के साथ टकराव हो गया था।



 मैंने आरबीआई का नजरिया बताया, लेकिन यह भी कहा कि सरकार कभी भी इसे खारिज कर सकती है। वह एक सरकारी योजना थी... आखिरकार, यह सरकार ने आरबीआई को निर्देश दिया और अनबन खत्म हो गई।' उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार NRIs के लिए पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम के तहत आवेदन की नीति पर आरबीआई को अपना काम करने की छूट दे सकती थी। मनमोहन सिंह ने कहा कि आरबीआई तब तक कुछ नहीं कर सकता है जब तक कि उसे राजनीतिक मामलों की मंत्रीमंडलीय समिति की स्वीकृति से वाकिफ नहीं किया जाए। किताब में एक और घटना का जिक्र करते हुए कहा गया है कि मनमोहन सिंह को भारत में कुछ शाखाएं खोलने के बैंक ऑफ क्रेडिट ऐंड कॉमर्स इंटरनैशनल के आवेदन पर भी कड़ा ऐतराज था। जब चरण सिंह प्रधानमंत्री बने तो बैंक को इसकी अनुमति लगभग दी दे गई, हालांकि 1983 में कांग्रेस सरकार से आखिरी स्वीकृति मिली। गौरतलब है कि 2014 की किताब में प्रकाशित मनमोहन सिंह का यह बयान मौजूदा स्थिति में खासा महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार और रिजर्व बैंक के बीच तनातनी की खबरें सार्वजनिक हो चुकी हैं और आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल तथा वित्त मंत्री अरुण जेटली दोनों ही एक-दूसरे के लिए तल्खी जता चुके हैं। इससे पहले, देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की तत्कालीन आरबीआई गवर्नर को लिखी चिट्ठी + से भी मोदी सरकार का पक्ष मजबूत हो चुका है।