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कैप्टन सरकार खत्म करना चाहती है पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम को

Date : 2018-10-31 04:55:00 PM

जालंधर//(31-10-2018)-शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने कहा है कि अनुसूचित जाति के छात्रों को पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के तहत 442 करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान जारी करने में विफल होने के बाद काग्रेस सरकार अब पूरी योजना को खत्म करने के फिराक में है। इसी वजह से नए आवेदकों से आय प्रमाण पत्र माग रही है।पूर्व मुख्य संसदीय सचिव और अकाली दल के वरिष्ठ नेता पवन कुमार टीनू ने कहा कि काग्रेस सरकार अब एससी छात्रों को अगले शैक्षणिक सत्र के लिए स्कूलों में प्रवेश लेने के लिए पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप का लाभ उठाने के लिए आय प्रमाण पत्र जमा करने के लिए मजबूर कर रही है। अब तक छात्रों को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति का लाभ उठाने के लिए स्वयं घोषणा पत्र देना होता था। टीनू ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति के परिवारों को परेशान किया जा रहा है और योजना के अनुसार सालाना 2,600 रुपये का लाभ उठाने के लिए 2,000 रुपये खर्च करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 



सेवा केंद्रों में भारी भीड़ के कारण एससी परिवारों को आय प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए कम से कम दो से तीन दिन खराब करने पड़ रहे हैं। यही नहीं एससी परिवारों तो फॉर्म और शुल्क के लिए भी भुगतान करना पड़ रहा है।टीनू ने कहा कि सरकार ने राज्यभर के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ रहे दो लाख अनुसूचित जाति के छात्रों को 442 करोड़ रुपये की मैट्रिक स्कॉलरशिप के वितरण को रोक दिया है। अब यह सुनिश्चित करने के लिए बाधाएं पैदा कर रही हैं कि स्कूलों में इस छात्रवृत्ति का लाभ उठाने वाले छात्र ऐसा करने में सक्षम नहीं हैं। विशेषाधिकार प्राप्त छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं रहेंगे और घर-घर नौकरी योजना के लिए कोई लेने वाला नहीं होगा, जो कि केवल कागजात में है।टीनू ने यह भी पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय केंद्रीय जाच की माग की कि क्यों काग्रेस सरकार एससी छात्रों को केंद्र से प्राप्त 442 करोड़ रुपये जारी नहीं कर रही है। उन्होंने केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय से भी अनुरोध किया कि पंजाब सरकार की किसी भी भागीदारी के बिना केंद्रीय मंत्रालय से सीधे लाभार्थी खातों में पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप जारी करने के लिए एक तंत्र तैयार किया जाए।