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मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में सामने आई गंभीर लापरवाही।किसी और को थमा दिया शव

Date : 2018-10-30 01:25:00 PM

भोपाल//(30-10-2018)-भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर(बीएमएचआरसी) में गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां मर्चूरी स्टाफ ने एक मरीज की डेडबॉडी उनके वास्तविक परिजनों की बजाय किसी और को सौंप दी। इसका खुलासा तब हुआ जब परिवार के लोग अंतिम संस्कार के लिए शव लेने बीएमएचआरसी पहुंचे। इतना ही नहीं जो लोग बॉडी ले गए थे, उन्होंने रविवार शाम ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया था। इसे लेकर सोमवार को परिजनों और एक समुदाय विशेष के लोगों ने धरना देकर प्रदर्शन किया और नाराजगी जताई। इस मामले में निशातपुरा थाने में अस्पताल कर्मचारियों और एक अन्य के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का केस दर्ज किया गया है।


22 अक्टूबर को गोविंदपुरा निवासी 68 वर्षीय कुंजमॉन केपी हार्ट अटैक के बाद सीसीयू में भर्ती हुए थे। पांच दिन तक चले इलाज के बाद 27 अक्टूबर काे दोबारा उन्हें अटैक आया और उनकी मौत हो गई। चूंकि अधिकांश रिश्तेदार केरल में रहते हैं, इसलिए परिजनों ने उनकी बॉडी 29 अक्टूबर तक मर्चुरी में रखने का अनुरोध किया।होशंगाबाद जिले के बड़वई निवासी 75 वर्षीय खुशीलाल सैनी श्वांस रोग की शिकायत के बाद बीएमएचआरसी में भर्ती हुए थे। इलाज के दौरान रविवार को उनकी मौत हो गई। इस पर पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के पैरामेडिकल स्टाफ ने उनकी बॉडी मर्चूरी में शिफ्ट कर दी। रविवार शाम खुशीलाल के  बेटे प्रेमनारायण सैनी उनका शव लेने वहां पहुंचे तो मर्चूरी स्टाफ ने उन्हें बाॅडी पहचानने को कहा। प्रेमनारायण ने गफलत में कुंजमाॅन की बॉडी की पहचान पिता के शव के रूप में की और मेडिकल सुपरिटेंडेंट मर्चूरी प्रभारी डॉ. अनुराग यादव  से शव लेकर होशंगाबाद रवाना हो गया और वहां अंतिम संस्कार भी कर दिया। मर्चूरी में मरीज की मौत के बाद शव परिजनों की मौजूदगी में रखा जाता है। शव के साथ प्रोविजनल डेथ सर्टिफिकेट भी रखा जाता है, जिस पर नाम लिखा होता है।

 ताकि शव सौंपते समय पहचान को लेकर कोई गलती न हो। शव बदलने के इस मामले में स्टाफ ने शव पर लगा टैग और साथ रखे गए जरूरी डॉक्यूमेंट वेरिफाई नहीं किए गए। शव की सुपुर्दगी से पहले परिजनों से शव की पहचान कराई जाती है। इसके लिए मर्चूरी का स्टाफ परिजनों को शव का चेहरा दिखाते हैं। इस मामले में स्टाफ ने प्रेमनारायण को केवल शव का आधा चेहरा दिखाकर पहचान कराने की खानापूर्ति की। कर्मचारी ने प्रेमनारायण को दलील दी कि पूरा चेहरा खोलने पर वह गल जाएगा।सीएसपी निशातपुरा लोकेश सिन्हा ने बताया कि अब तक की जांच में शव देने वाले अस्पताल के कर्मचारियों और शिनाख्ती कर शव लेने वाले परिवार की गलती सामने आई है। शव लेने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे दूसरे परिवार की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। परिजनों की शिकायत मिलने के बाद अस्पताल के कर्मचारियों और शव की शिनाख्ती करने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 297 के तहत मामला दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। जांच में जो भी सामने आएगा उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कुछ लोगों से पूछताछ कर रहे हैं। किसी की गिरफ्तारी नहीं की है।