BREAKING NEWS

image caption:

ड्यूटी के साथ-साथ थाने में ही पाल रही हैं 6 माह की बेटी,'मदर कॉप' अर्चना

Date : 2018-10-27 05:11:00 PM

यूपी //(27-10-2018)-यूपी के झांसी जिले के थाना कोतवाली में आप जाएंगे तो दूर से ही आपकी नजरें महिला सिपाही अर्चना जयंत पर जरूर पड़ेंगी। एक टेबल के पास आगंतुक रजिस्टर पर कुछ काम करते हुए तल्लीन नजर आती हैं लेकिन जब थोड़ा करीब जाएंगे तो टेबल पर एक मासूम बच्ची को देखकर हैरान होंगे। दरअसल, यह बच्ची अर्चना की 6 महीने की बेटी अनिका है। अर्चना ड्यूटी के साथ-साथ थाने में ही अपनी बेटी को भी पाल रही हैं। एक तरफ मां का कर्तव्य और दूसरी तरफ सिपाही की 24 घंटे वाली टफ ड्यूटी, अर्चना दोनों को ही बखूबी निभाती हैं और बेहद संयमित नजर आती हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर अर्चना की यह तस्वीर खूब वायरल हो रही है। हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है और मदर कॉप की उपाधि दे रहा है। एनबीटी से बातचीत में अर्चना बताती हैं कि वह झांसी में एक किराये के मकान में रहती हैं। 

अनिका के होने के बाद वह 6 महीने तक लीव पर थीं। पिछले महीने से ही वह ड्यूटी पर वापस लौटी हैं। चूंकि शहर में उनके साथ कोई और नहीं है इसलिए अर्चना अनिका को अपने साथ ही ड्यूटी पर ले जाती हैं। अर्चना की एक बड़ी बेटी भी है, जो कानपुर में दादा-दादी के पास रहकर पढ़ाई कर रही है। वहीं उनके पति गुड़गांव में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं। दोनों ड्यूटी एक साथ निभाना कितना चैलेंजिंग है, इस पर वह बताती हैं, 'मुश्किल तो है ही लेकिन मेरे लिए दोनों ही बेहद मायने रखती है, इसलिए मैं ड्यूटी के साथ-साथ अपनी बच्ची की देखरेख भी करती हूं।' वह बताती हैं, 'वैसे तो एक सिपाही की ड्यूटी 24 घंटे होती है लेकिन स्टाफ के सपोर्ट की वजह से नौकरी के घंटे घट जाते हैं।' अर्चना आगे कहती हैं, 'हालांकि कभी-कभी ऐसी स्थिति भी सामने आती है जब किसी न होने पर होने पर ड्यूटी पर बुलाया जाता है। तो मैं अनिका को भी साथ लेकर जाती हूं।' अर्चना ने अनिका के साथ रात की ड्यूटी भी की है। वह यह सब कैसे संभालती है, इसके जवाब में वह कहती हैं, 'मैंने अनिका के लिए एक बैग तैयार किया है जिसमें सब कुछ पहले से तैयार होता है। मुझे उसमें बस दूध की बोतल रखनी होती है।' अर्चना बताती हैं कि थाने का स्टाफ और उनकी सहेली भी अनिका की देखभाल में मदद करती हैं। 


हालांकि अर्चना बताती हैं कि वह आगरा के लिए ट्रांसफर चाहती हैं जिसके लिए उन्होंने अगस्त में आवेदन किया था। बकौल अर्चना, 'मेरे माता-पिता आगरा में रहते हैं, इसलिए मैं वहां ट्रांसफर चाहती हूं ताकि बच्ची की देखभाल भी हो सके और मैं अच्छे से ड्यूटी भी कर सकूं।' अर्चना ने कहा कि आवेदन करने पर उन्हें कहा गया कि थानों से वैकेंसी की लिस्ट आने पर उन्हें बताया जाएगा। हालांकि अर्चना बताती हैं कि वह आगरा के लिए ट्रांसफर चाहती हैं जिसके लिए उन्होंने अगस्त में आवेदन किया था। बकौल अर्चना, 'मेरे माता-पिता आगरा में रहते हैं, इसलिए मैं वहां ट्रांसफर चाहती हूं ताकि बच्ची की देखभाल भी हो सके और मैं अच्छे से ड्यूटी भी कर सकूं।' अर्चना ने कहा कि आवेदन करने पर उन्हें कहा गया कि थानों से वैकेंसी की लिस्ट आने पर उन्हें बताया जाएगा।