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आलोक वर्मा की याचिका पर थोड़ी देर में सुप्रीम कोर्ट पर सुनवाई

Date : 2018-10-26 11:34:00 AM

नई दिल्ली -(26-10-2018)-केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अंदरखाने की लड़ाई अब सुप्रीम कोर्ट के दर पर पहुंच चुकी है। सीबीआई के निदेशक आलोक कुमार वर्मा से अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में थोड़ी देर में सुनवाई होगी। सीनियर ऐडवोकेट फाली एस नरीमन सुप्रीम कोर्ट में आलोक वर्मा का पक्ष रखेंगे। वहीं सीवीसी की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना की तरफ से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में पेश होंगे। सुप्रीम कोर्ट के लिए निकलते वक्त मुकुत रोहतगी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह मात्र एक और केस है, इसमें बड़ा क्या है? आप जितना सोच रहे हैं, यह उतना अहम नहीं है। आपको बता दें कि सीबीआई निदेशक वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने और अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी व एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है। वर्मा की दलील है कि सीबीआई डायरेक्टर का कार्यकाल दो साल का होता है और उन्हें उस पद से हटाने की सरकार की कार्रवाई से सीबीआई की स्वतंत्रता पर आघात हुआ है। 


चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ वर्मा की याचिका पर सुनवाई करेगी। एक गैर सरकारी संगठन 'कामन कॉज' ने भी गुरुवार को याचिका दायर कर जांच एजेंसी के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के मामले की जांच विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने की मांग की थी। वर्मा की याचिका पर सुनवाई गैर सरकारी संगठन की याचिका के साथ ही होगी। इस सुनवाई से पहले शुक्रवार शाम को सीबीआई ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि वर्मा और अस्थाना को उनके पद से हटाया नहीं गया है। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना सीबीआई के डायरेक्टर और स्पेशल डायरेक्टर के पद पर बने रहेंगे। सीबीआई के मुताबिक हालिया कदम केवल अंतरिम व्यवस्था के लिए उठाए गए हैं। सीबीआई प्रवक्ता ने शुक्रवार को एक बयान में कहा था कि जब तक केंद्रीय सतर्कता आयोग इस मामले की जांच कर रहा है तब तक एम नागेश्वर राव सीबीआई डायरेक्टर का काम करेंगे।

सीबीआई के टॉप 2 बॉस के बीच की जंग सामने आने के बाद मोदी सरकार ने सतर्कता आयोग कि सिफारिश पर सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था। वर्मा को हटाए जाने के कुछ घंटे बाद ही 'जनहित' में राव को सीबीआई डायरेक्टर बनाया गया। इसके साथ ही सीबीआई के 13 अफसरों का ट्रांसफर किया गया। अस्थाना के खिलाफ रिश्वतखोरी मामले की जांच के लिए वर्मा की बनाई पूरी टीम भी खत्म कर दी गई। सीबीआई अधिकारियों के तबादले के अलावा उसके चीफ और डेप्युटी चीफ को छुट्टी पर भेजने के फैसले आधी रात को हुई सीवीसी की मीटिंग के बाद लिए गए। बैठक 1.00 बजे को खत्म हुई और चंद घंटों के भीतर सुबह होने से पहले राव ने सीबीआई के अंतरिम निदेशक का पद संभाल लिया। इस पूरे विवाद के दोनों छोर पर वर्मा और अस्थाना, जबकि बीच में मीट कारोबारी मोइन कुरैशी हैं। वर्मा और अस्थाना के तल्ख रिश्तों की शुरुआत पिछले साल अक्टूबर में हुई जब सीबीआई डायरेक्टर ने अस्थाना को स्पेशल डायरेक्टर प्रमोट किए जाने पर आपत्ति जताई। अस्थाना ने बाद में वर्मा के खिलाफ मीट कारोबारी के सहयोगी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये लेने का आरोप लगाया। उधर, सीबीआई ने अपने स्पेशल डायरेक्टर अस्थाना के खिलाफ ही 15 अक्टूबर को रिश्वतखोरी का केस दर्ज कर लिया। 

FIR में अस्थाना पर उसी सतीश बाबू सना से 3 करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया, जिसका आरोप वह वर्मा पर लगा रहे थे। इसके 4 दिनों बाद अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को खत लिखकर सीबीआई डायरेक्टर वर्मा पर करप्शन के आरोप लगाए। अस्थाना हाई कोर्ट भी गए जहां उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिली। इस बीच सीबीआई ने अस्थाना के एक सहयोगी सीबीआई डीएसपी को ही गिरफ्तार कर लिया। अपने ही दफ्तर में सीबीआई की छापेमारी के इस मामले ने तूल पकड़ लिया। बाद में मोदी सरकार ने न केवल टॉप के इन दो अफसरों को हटाया बल्कि 3 अडिशनल डायरेक्टरों के बजाय उनसे जूनियर जॉइंट डायरेक्टर एम. नागेश्वर राव को अंतरिम डायरेक्टर की जिम्मेदारी सौंप दी। इसके अलावा सरकार ने बुधवार को एजेंसी में तमाम अफसरों के ताबड़तोड़ तबादले के आदेश दिए। इनमें से कई अफसर अस्थाना पर लगे आरोपों की जांच में शामिल थे सीबीआई विवाद सामने आने के बाद विपक्ष खासकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि वर्मा राफेल की फाइल मंगा रहे थे इसलिए उन्हें हटाया गया। कांग्रेस ने कहा कि यह फैसला चीफ जस्टिस और नेता प्रतिपक्ष को बताए बिना लिया गया, इसलिए यह असंवैधानिक है। राहुल गांधी ने शुक्रवार रात ट्वीट कर कहा, 'राफेल घोटाले की जांच ना हो पाए इसलिए प्रधानमंत्री ने CBI प्रमुख को असंवैधानिक तरीक़े से हटा दिया। CBI को पूरी तरह नष्ट किया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी, कल, इसके विरोध में देश के हर CBI दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करेगी। मैं CBI मुख्यालय, दिल्ली, सुबह 11 बजे से, इसका नेतृत्व करूंगा।'