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नीले कार्डो के घोटाले में क्लीनचिट देकर विभाग फंसा अपने ही जाल में

Date : 2018-10-24 12:02:00 PM

जालंधर//(24-10-2018)-अमरीक नगर में नीले कार्डो के घोटाले में क्लीनचिट देकर विभाग अपने ही जाल में फंस गया है। डीएफएससी ऑफिस के रिकार्ड के मुताबिक इस साल जनवरी से अब तक न तो नीले कार्डो की संख्या बढ़ी है और न ही कोटा। मार्च से नए नीले कार्ड के लिए आवेदन करने वाली साइट भी बंद है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि जब जनवरी से अब तक नीले कार्डो की संख्या न बढ़ी, न घटी तो अमरीक नगर में सितंबर में अचानक नीले कार्ड कहा से आ गए।क्लीनचिट देने वाले विभाग के इंस्पेक्टर जगजीत सिंह से सवाल किया तो उनकी जुबान लडख़ड़ाती नजर आई। उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ याद नहीं है रिकार्ड देखकर ही कुछ बता सकते हैं। उधर, डिप्टी कमिश्नर वरिंदर कुमार शर्मा के हस्तक्षेप के बावजूद डीएफएससी रविंदर सिंह, इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। सितंबर में मिली थी पर्चिया, तब मामला गर्माया


काजी मंडी से सटे अमरीक नगर के लगभग 300 से ज्यादा लोगों ने चार साल पहले नीले कार्डो के लिए आवेदन किया था। इस साल सितंबर में उन्हें नीले कार्ड तो नहीं मिले, लेकिन लगभग 12 किमी दूर दानिशमंदा के एक डिपो से गेहूं ले जाने की पर्चिया मिलीं। ये पर्चिया भी सिर्फ 28 लोगों को ही मिलीं। अचानक पर्चिया मिलने पर मामला गर्माया तो पता चला कि अमरीक नगर क्षेत्र के गरीबों के लिए हर छह महीने में आने वाला लगभग 36 टन गेहूं अधिकारी खुद हड़प रहे थे। गाधी कैंप में भी अगस्त में ऐसा मामला सामने आया था। तब राजनीतिक दबाव में मामला दब गया था। सूत्रों की मानें तो पूरे स्कैंडल की जाच हो तो हजारों टन गेहूं का घोटाला सामने आ सकता है। अमरीक नगर में जो पर्चिया बाटी गई थीं वह चार साल पुरानी 5 लाख 70 हजार की सीरीज की थीं, जबकि वर्तमान में नीले कार्डो की 7 लाख के ऊपर की सीरीज चल रही है, इससे साफ है कि गरीबों के हिस्से का गेहूं पिछले चार सालों से हजम किया जा रहा था। भ्रष्टाचार के ये हैं आधार

डीएफएससी ऑफिस के रिकार्ड के अनुसार जिले में इस साल एक जनवरी को नीले कार्डो की कुल संख्या 2,48549 दर्ज थी। उन्हें 2,89,06 क्विंटल गेहूं आवंटित किया गया था। दस माह बाद आज भी नीले कार्ड धारकों की यही संख्या रिकार्ड में दर्ज है और गेहूं का कोटा भी उतना जा रहा है। इससे साफ है कि सितंबर में अमरीक सिंह नगर में नीले कार्डो की जो पर्चिया पुरानी सीरीज की सामने आईं, वे नई नहीं थी। इनके नीले कार्ड पहले से ही बने थे। उनका गेहूं गरीबों के पेट में जाने की बजाय, अधिकारियों के पेट में जा रहा था। ये मामला भी दबायाइसी साल 14 अगस्त को एसडीएम-1 संजीव शर्मा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने गरीबों को बाटने के लिए आया 236 बोरी गेहूं बीएसएफ कॉलोनी में डिपो होल्डर की कोठी नं. 37 से बरामद कर सील किया था। बाद में एक दबंग काग्रेसी नेता के दबाव में मामला दबा दिया गया था। उस समय तो दलील दी गई कि डिपो होल्डर का लाइसेंस रद कर दिया गया है, जबकि डीएफएससी ऑफिस के रिकार्ड में आज तक डिपो होल्डर भगवान सिंह का लाइसेंस रद नहीं हुआ। उसके परिवार के पहले से ही चार डिपो चल रहे हैं।