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अमृतसर ट्रेन हादसे के ये हैं 8 मुजरिम

Date : 2018-10-20 07:05:00 PM

अमृतसर //(20-10-2018)-अमृतसर ट्रेन हादसे के बाद सभी एक-दूसरे पर आरोप लगाने में लगे हुए हैं। देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब इतने लोगों की मौत के बाद भी किसी को भी दोषी नहीं माना जा रहा हो। 5 सेकेंड में 60 से ज्यादा लोगों को ट्रेन ट्रैक पर काटती चली गई, वो किसकी गलती से हुआ, इसके बारे में कोई भी बात नहीं कर रहा है। रेल राज्यमंत्री ने रेलवे प्रशासन की गलती मानने से इनकार कर दिया है तो सिद्धू दंपति रेलवे की गलती बता रहा है।

अमृतसर ट्रेन हादसे पर सिर्फ रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ही नहीं, बल्कि रेलवे बोर्ड के चेयरमैन भी गोल-गोल घूमा रहे हैं। मतलब मंत्री से लेकर अधिकारी तक अपने हादसे की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर रहे हैं। इतने बड़े हादसे पर भी जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग ऐसे सफेद झूठ बोलते हैं, जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो।नहीं ये रेलवे की चूक नहीं है, क्योंकि रेलवे प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई थी कि इस तरह का आयोजन हो रहा है। रेलवे बोर्ड के चेयरमैन साहब कहते हैं कि जहां पर हादसा हुआ, वहां से ड्राइवर ने स्पीड स्लो की है।

ये रावण दहन कार्यक्रम की चीफ गेस्ट थीं। पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। चश्मदीदों ने आरोप लगाए हैं कि जैसे ही हादसा हुआ ये वहां से कार में बैठकर निकल गईं। लेकिन थोड़ी देर बाद ही नवजोत कौर सिद्धू अमृतसर के सिविल अस्पताल में दिखीं और कहा कि हादसा उनके जाने के बाद हुआ। पंजाबी में स्थानीय थाने की ये चिट्ठी में साफ-साफ कहा गया है कि आयोजक ने कार्यक्रम के लिए इजाजत ली थी तो फिर सुरक्षा इंतजाम के लिए क्या किया गया। लोगों को ट्रैक पर मरने के लिए क्यों छोड़ दिया गया। 

सबसे ज्यादा लापरवाही किसी ने बरती वो इस फाटक पर उस वक्त मौजूद वो गेटमैन था। जिसे 300 मीटर दूर ट्रैक पर खड़ी भीड़ नहीं दिखी। अगर गेटमैन सतर्क रहता तो हादसे को बिल्कुल टाला जा सकता था। क्या सीधी ट्रैक पर आने वाली ट्रेन के ड्राइवर को पटरी पर मौजूद ये भीड़ नहीं दिखाई दी। रात में पुतला दहन के वक्त तेज रोशनी थी।कम से कम कार्यक्रम के आयोजकों को तो पटरी पर खड़े लोग दिखाई दिए होंगे। उन्होंने हादसा रोकने के लिए क्या किया ? 

हादसे के ठीक पहले के वीडियो में लोग बेपरवाह पटरी पर खड़े थे। क्या इनको नहीं पता था कि ये चालू ट्रैक है और ट्रेन कभी भी किसी भी वक्त आ सकती है। फिर ये लोग जान हथेली पर रखकर ट्रैक पर क्यों खड़े थे। जबकि एक ट्रेन थोड़ी देर पहले ही गुजरी थी। फिर भी लोग पटरी पर क्यों खड़े रहे।