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अध्यापको ने आप्शन के नोटीफिकेशन की कापियां जलाई,घबराई सरकार,किया 5 को ससपेंड

Date : 2018-10-11 05:35:00 PM

अपनी मांगो को ले कर मरण व्रत पर बैठे अधिआपको ने आज डुप्टी कमिश्नर के दफ्तर के आगे मुख मंत्री का पुतला जलाया ,और सरकार की तरफ से जारी किये गए आदेशों की कापीओ को भी जलाया ,टीचरों का संघर्ष बुधवार को चौथे दिन में शामिल हो गया है और नोटिफिकेशन के विरोध में जसप्रीत कौर, राजिन्दर कौर, नमिता, कुलजीत कौर, प्रदीप वर्मा और ऋतु बाला ने भूख हड़ताल शुरु कर दी है । वहीं सस्पेंड टीचरों ने अपने नए हैडक्वार्टर पर अभी ज्वाइन करने से साफ मना करते हुए कहा है वे संघर्ष में शामिल होंगे। जहां अधिआपको की तनखाह कम कर के रेगुलर करने की बात को ले कर बहुत ज़यादा रोस था ,वही सरकार की तरफ से संघर्ष कर रहे अधिआपको को ससपेंड करने और बदली करने के फैसले से भी बहुत ज़यादा निराश हुए ,इस के चलते अधिआपको ने यह साफ़ कर दिया के सरकार अब जितने भी जुलम कर ले ,पर वह अपनी मांगो की लड़ाई को जारी रखेंगे,

और अब वह सरकार दी खोखली धमकिओं से नहीं डरेंगे,साथ में ही अधिआपको ने यह भी कहा के चाहे सरकार प्रदर्शन कर रहे अधिआपको की बजाए सभी अधिआपको को ससपेंड कर दे लेकिन फिर भी वो अपनी लड़ाई जारी रखे गे ,
अध्यापकों ने यह भी कहा कि मांगों को लेकर रोष जताना हर नागरिक का अधिकार है। अगर कोई अध्यापक मांगों को लेकर प्रदर्शन करता है और उसे सस्पेंड करना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सरकार अध्यापकों की मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रही है और ऐसे में अध्यापक अपना संघर्ष तेज करेंगे। उन्होंने सरकार से ठेके पर काम करने वाले अध्यापकों को जल्द से जल्द पक्का करने की भी मांग की। प्रदर्शन में करनैल सिंह, कुलदीप कुमार, बलवीर सिंह, मनजिंदर सिंह, जसवंत सिंह, मुल्खराज शर्मा, सुरिंदर नाईमजारा, बलवीर सिंह रक्कड़, यशपाल शर्मा आदि शामिल थे। 

आखिर क्या है मामला....
आप को बता दे की पंजाब सरकार की तरफ से 2013  में सभी अध्यापकों  को पक्के करने के आर्डर प्रपात किये गए थे ,जिस के तहत सभी अध्यापकों  को पक्का करना चाहिए था , जिस के चलते 5178 अध्यापकों  की निजुक्ति पत्र के निर्देशों के मुताबिक नवंबर  2017  से रेगुलर होने चाहिए थे ,लेकिन अब 2018  में सेंट्रल सरकार अपने किये हुए वादो से मुकर रही है .अधिआपको को  पक्के  करने की जगह मिलती तनखाह में भी सरकार ने कटौती कर दी ,और कहा के अध्यापकों  को रेगुलर करने के लिए पहले 3  साल तक उन्हें पक्का न कर के उनकी बनती तनखाह में भी कटौती की जाए 

हलका सुनाम के आम आदमी पार्टी से विधायक अमन अरोड़ा ने टीचरों के संघर्ष में शामिल होकर न केवल उनका हालचाल पूछा, बल्कि उनको आम आदमी पार्टी की ओर से अपना पूरा समर्थन देने की बात कही। उनके साथ आम के पंजाब उपाध्यक्ष डॉ. बलबीर ¨सह भी आए थे  

ये है ऑप्शन

शिक्षा विभाग ने टीचरों को ऑप्शन दिया है कि वे अगर शिक्षा विभाग के अधीन आना चाहते हैं तो आ सकते हैं। इसके लिए उनको तीन साल के लिए 15000 रुपये वेतन मिलेगा। अगर वे नहीं आना चाहते तो वह वहीं पर मौजूदा वेतन पर उसी संस्था (एसएसए, रमसा वगैरह) काम करते रहें।
24 घंटे में ही डर गई सरकार 

वहीं सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली SSA रमसा यूनियन के अध्यक्ष दीदार सिंह मुदकी ने  कहा कि यह कार्रवाई सरकार की गबराहट का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सरकार अध्यापकों के 24 घंटे के संघर्ष से ही घबरा गई है लेकिन अध्यापक सरकार के डरावे से डरने वाले नहीं है और वह अपना संघर्ष निरंतर जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि अभी तो सिर्फ 5 अध्यापक सस्पेंड हुए हैं 8881 अध्यापक बाकी है और यह अभी शुरुआत मात्र है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि उनकी जायज मांगों को मानते हुए उन्हें तंग परेशान करना बंद करे ताकि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का सुहावना माहौल सृजित किया जाता है। 

नहीं लिखा मुअतली का कारण
 रमसा के 5 अध्यापकों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने के आदेश देर शाम जारी किए हैं। ताजूब की बात तो यह है कि सस्पेंड किए गए अध्यापकों के सस्पेंशन आॅर्डरों में मुअतली का कारण तक नहीं लिखा गया। यही नहीं 5 अध्यापकों को सस्पेंड करके उनका हैडकवाटर भी जिले से बाहर बनाया है ताकि वे पटियाला में चल रहे विरोध प्रर्दशनों से दूर रहें। 

,5  नहीं  सभी परदर्शनकारियों को ससपेंड करो 
 शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए है के जो अधयापक  प्रदर्शन  करने के लिए बैठे है उन को ससपेंड किया जाये गा,,जिस के चलते उन्हों ने 5  अधिआपको को ससपेंड कर भी दिया है , अधिआपको ने इस बात का विरोध करते हुए नारे लगाए ,
"5  नहीं सब को ससपेंड करो "

पंजाब सरकार मुकरी अपने वादों से 

 अध्यापक नेता कुलदीप सिंह दौड़का ने बताया कि शिक्षा मंत्री ओपी सोनी ने एक कार्यक्रम में मांगों के लिए संघर्षरत अध्यापकों पर आरोप लगाया था कि वे मांगों के नाम पर शैक्षणिक माहौल खराब कर रहे हैं। दौड़का ने कहा कि अध्यापक अपने संवैधानिक हक का इस्तेमाल कर सार्वजनिक शिक्षा व सरकारी स्कूलों को बचाने और अपना रोजगार पक्का करवाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आदर्श स्कूल पीपीपी मोड की प्राइवेट कंपनियों द्वारा सरकारी खजाना लूटने का विरोध कर रहे 42 अध्यापकों की सेवाएं खत्म की गई हैं। मुख्यमंत्री ने 27 अप्रैल की मीटिंग में सभी मांगों पर सहमति जता कर अचार सहिंता लगने के कारण अध्यापकों को पक्के करने में असमर्थता जताई थी और कहा था कि 4 जून की मीटिंग में एलान किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने भी ठेका आधारित अध्यापकों को पक्का करने का वादा किया था, जो पूरा नहीं किया गया।