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फीफा : फ्रांस के 78.3% खिलाड़ी शरणार्थी परिवारों से, क्रोएशिया के 15.4% खिलाड़ी विदेश में जन्मे

Date : 2018-07-14 02:22:00 PM

मॉस्को : फुटबॉल विश्व कप के फाइनल में रविवार को फ्रांस-क्रोएशिया की टीमें आमने-सामने होंगी। क्रोएशिया पहली बार फाइनल में है। फ्रांस 12 साल बाद खिताबी मुकाबले में पहुंचा है। फ्रांस की आबादी में शरणार्थियों की संख्या 6.8 फीसदी है, लेकिन उसकी टीम में 78.3% खिलाड़ी शरणार्थी परिवारों से हैं। वहीं, क्रोएशिया की टीम में भी 15.4 फीसदी खिलाड़ी ऐसे हैं, जो विदेशी मूल के हैं। क्रोएशियाई कप्तान लुका मोड्रिच एक शरणार्थी शिविर में ही पले-बढ़े।

फ्रांस के टॉप-2 गोल स्कोरर में एक अफ्रीकी मूल के एम्बाप्पे: इस विश्व कप में फ्रांस ने अब तक 10 गोल किए हैं। इनमें से एंटोनी ग्रीजमैन और किलियन एम्बाप्पे ने सबसे ज्यादा 3-3 गोल किए। एम्बाप्पे का जन्म तो फ्रांस में हुआ, लेकिन उनकी मां अल्जीरियाई और पिता कैमरून मूल के हैं। एम्बाप्पे टीम के स्टार खिलाड़ी हैं। इस विश्व कप में इमर्जिंग प्लेयर की रेस में भी वे सबसे आगे हैं। वहीं फ्रांस के लिए गोल करने वाले सैमुएल उम्तिती भी कैमरून में जन्मे हैं। फ्रांस के 12 खिलाड़ियों का जन्म अफ्रीकी देशों में हुआ है। मौजूदा टीम में शामिल और पिछले विश्व कप में इमर्जिंग प्लेयर रहे पॉल पोग्बा और एनगोलो कान्टे भी मूल रूप से फ्रांस के नहीं हैं।

कभी शरणार्थी रहे क्रोएशिया के खिलाड़ियों ने 25% गोल किए : महज 40 लाख की आबादी वाली क्रोएशिया की टीम के 4 खिलाड़ी ऐसे हैं, जिनका जन्म देश से बाहर हुआ। इनमें इवान रकिटिच और माटेओ कोवाचिच भी शामिल हैं। रकिटिच का स्विट्जलैंड और कोवाचिच का ऑस्ट्रिया में जन्म हुआ है। लुका मोड्रिच और टीम के उनके कुछ साथियों ने बचपन में खूनी संघर्ष भी देखा। देश की आजादी को लेकर हुए संघर्ष की वजह से उनका बचपन शरणार्थी शिविर में गुजरा। कहा जाता है कि फुटबॉल खेलना उन्होंने वहीं से शुरू किया। क्रोएशिया ने इस विश्व कप में 6 मैच में 12 गोल किए हैं। इनमें मोद्रिच ने 2 और रकिटिच ने 1 गोल किए हैं।

यूरोपीय टीमों के 26% खिलाड़ी शरणार्थी परिवारों से: इस विश्व कप में 32 टीमें खेलने उतरीं। इनमें 14 टीमें यूरोप की थीं। इनके 322 खिलाड़ियों में से 83 खिलाड़ी शरणार्थी परिवारों से हैं। सबसे ज्यादा शरणार्थियों वाली टीम फ्रांस है। बेल्जियम में अप्रवासियों की आबादी 12.1 फीसदी है। दूसरे नंबर पर जर्मनी है। वहां 11.3 फीसदी आबादी अप्रवासियों की है, जबकि जर्मनी की टीम में 39.1% खिलाड़ी अप्रवासी परिवारों से हैं।