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10 बार चैम्पियन टीम के खिलाड़ी को मिले गोल्डन ग्लव-गोल्डन बॉल : फीफा

Date : 2018-07-13 02:54:00 PM

खेल : 14 जून को शुरू हुआ फुटबॉल विश्व कप 15 जुलाई को लुझनिकी स्टेडियम में फ्रांस और क्रोएशिया के बीच फाइनल मैच के साथ समाप्त हो जाएगा। इस दौरान पिछले 30 दिनों में कई पुराने रिकॉर्ड टूटे, लेकिन कुछ चीजें इस बार भी नहीं बदलीं। जैसे गोल्डन बूट के तगड़े दावेदार इंग्लैंड के हैरी केन की टीम फाइनल में नहीं पहुंची। 20 विश्व कप में से केवल 5 बार ही सबसे ज्यादा गोल करने वाले फुटबॉलर की टीम चैम्पियन बन सकी है। फाइनल पहुंचने वाले क्रोएशिया के लुका मोड्रिक और फ्रांस के किलिएन एम्बाप्पे गोल्डन बॉल की रेस में सबसे आगे हैं। विश्व कप में अब तक 10 विजेता टीमों के खिलाड़ियों को गोल्डन बॉल मिली। गोलकीपर्स में फ्रांस के हुगो लॉरिस और क्रोएशिया के डेनियल सुबासिच गोल्डन ग्लव के दावेदार हैं। इसमें भी 10 चैम्पियन टीम के खिलाड़ी को ही गोल्डन ग्लव मिला।

20 साल से गोल्डन बॉल जीतने वाले की टीम चैम्पियन नहीं बनी: विश्व कप में भले ही 10 चैम्पियन टीमों की झोली अब तक गोल्डन बॉल गई हो लेकिन पिछले 5 विश्व कप में विजेता टीम का खिलाड़ी इसे हासिल नहीं कर सका। इनमें 4 बार फाइनल में और 1 बार सेमीफाइनल में गोल्डन बॉल विजेता की टीम हार गई। आखिरी बार 1994 में ब्राजील के रोमारियो को ये अवॉर्ड मिला था और उनकी टीम फाइनल जीती थी। वहीं, पिछले 5 विश्व कप में 4 बार गोल्डन ग्लव जीतने वाले खिलाड़ी की टीम चैम्पियन बनी। 2002 में जर्मनी के गोलकीपर ओलिवर कान को गोल्डन ग्लव मिला लेकिन टीम हार गई।

2002 के बाद गोल्डन बूट विजेता की टीम नहीं बनी चैम्पियन:विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी की टीम चैम्पियन नहीं बने यह एक हैरानी की बात ही होती है। लेकिन आंकड़ें ये कहते हैं कि 1930 से शुरू हुए विश्व कप में केवल 5 बार ही ये अवसर आया है कि सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी की टीम ने खिताब पर भी कब्जा किया हो। आखिरी बार 2002 में ऐसा हुआ था जब ब्राजील के रोनाल्डो ने 8 गोल किए थे और टीम चैम्पियन बनी थी। उसके बाद 2006 में जर्मनी के मिरोस्लाव, 2010 में भी जर्मनी के ही थॉमस मुलर और 2014 में कोलंबिया के जेम्स रोड्रिगेज ने गोल्डन बूट तो जीता लेकिन टीम को चैम्पियन नहीं बना सके।

1982 से खिलाड़ियों को मिलने लगा अवॉर्ड: विश्व कप में बेस्ट प्लेयर के अवॉर्ड का नाम 1982 में गोल्डन बॉल किया गया। टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा गोल करने वाले को 1982 से गोल्डन शू का अवॉर्ड दिया जाने लगा। जिसका नाम बदलकर 2010 में गोल्डन बूट कर दिया गया। 1982 से पहले टॉप स्कोरर को कोई अवॉर्ड नहीं दिया जाता था, सिर्फ नाम की घोषणा होती थी। विश्व कप में सबसे बेहतरीन गोलकीपर को भी 1994 से अवॉर्ड देना शुरू किया गया। तब इसका नाम याशिन अवॉर्ड था। 2010 में इसका नाम गोल्डन ग्लव अवॉर्ड किया गया।

  • इस बार ग्रुप स्टेज में 2014 के मुकाबले प्रति मैच कम गोल हुए: 2014 विश्व कप में ग्रुप स्टेज में 2.8 गोल प्रति मैच किया गया था। जबकि, इस बार यह संख्या गिर कर 2.5 पर आ गई। हालांकि यह 2010 विश्व कप से ज्यादा है। तब प्रति मैच केवल 2.1 गोल हुए थे। इस बार निर्धारित समय के खत्म होने के बाद इंजरी टाइम में गोल की संख्या 16 है। यह पिछले दोनों विश्व कप से ज्यादा है। 2010 में 4 और 2014 में 9 गोल इंजरी टाइम में हुए थे। जिन टीमों ने इस बार ग्रुप स्टेज को पार किया उनका प्रति मैच पासिंग का औसत 520 रहा। जबकि 2014 में यह 446 था। वहीं जो टीमें ग्रुप स्टेज में बाहर हो गए उनका पासिंग औसत 430 रहा। यह पिछले विश्व कप से 19 कम है।